इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र पुलिस को दिया सख्त आदेश, नाबालिग के अपहरण और शादी के मामले में रिपोर्ट तलब
क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र पुलिस को दिया सख्त आदेश, नाबालिग के अपहरण और शादी के मामले में रिपोर्ट तलब।
दुद्धी/सोनभद्र।(प्रमोद कुमार) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक गंभीर प्रकरण में सोनभद्र पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए आगामी तिथि तक विस्तृत रिपोर्ट और एफआईआर की मूल प्रति न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। मामला बभनी थाना क्षेत्र का है, जहां एक नाबालिग लड़की के अपहरण, जबरन शादी और जातिगत भेदभाव के आरोपों के संबंध में कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस अधीक्षक सोनभद्र, क्षेत्राधिकारी एवं थाना प्रभारी बभनी यह सुनिश्चित करें कि मुकदमा अपराध संख्या 0129/2025 से संबंधित हस्तलिखित प्राथमिकी, चेक एफआईआर के साथ 7 अक्तूबर 2025 तक अदालत में प्रस्तुत हो।
साथ ही पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को निर्देश दिया गया है कि वह शपथपत्र दाखिल कर यह बताएं कि अब तक पीड़िता को क्यों बरामद नहीं किया जा सका।
याचिकाकर्ता गायत्री देवी ने आरोप लगाया कि 21 अगस्त 2025 को जब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया, तो पुलिस ने उचित कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की।
थानाध्यक्ष बभनी पर आरोप है कि उन्होंने पहले से तैयार किए गए प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर घटना को बदल दिया और वास्तविक संदर्भ को कमजोर कर दिया। प्रार्थिनी के अनुसार 24 अगस्त को जब वह थाना पहुंचीं, तो उन्हें गालियां दी गईं और जबरन अंगूठा लगवाया गया।मेडिकल जांच के दौरान भी कथित तौर पर जबरन हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए।
याचिका में कहा गया है कि पीड़िता की नाबालिग पुत्री दुर्गावती (जन्म तिथि 1 जनवरी 2008, हाईस्कूल प्रमाणपत्र अनुसार) को स्थानीय युवक प्रदीप गुप्ता ने शादी के लिए बहला-फुसलाया और अपने घर ले गया। आरोप है कि लड़की से शारीरिक संबंध भी बनाए गए तथा उसकी शादी की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दी गईं।
प्रार्थिनी ने आरोप लगाया कि वह अनुसूचित जाति (गोड़ समाज) से आती हैं, जबकि थाना प्रभारी उच्च जाति से हैं, जिसके चलते उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया और आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई।
अदालत ने यह आदेश दिया है कि 7 अक्तूबर 2025 को अगली सुनवाई के दिन पुलिस अधीक्षक सोनभद्र द्वारा दाखिल शपथपत्र और एफआईआर की हकीकत न्यायालय के सामने रखी जाए। आदेश की अनुपालना 48 घंटे के भीतर संबंधित पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के निर्देश भी रजिस्ट्रार (अनुपालन) को दिए गए हैं।
