1 min read

गनपत सहाय पी.जी. कॉलेज, सुल्तानपुर में सामूहिक रूप से हुआ ‘वंदे मातरम्’ गीत

Crime Journalist (सम्पादक – सेराज खान)

ब्यूरो चीफ सुल्तानपुर-आकृति अग्रहरि

गनपत सहाय पी.जी. कॉलेज, सुल्तानपुर में सामूहिक रूप से हुआ ‘वंदे मातरम्’ गीत।

सुल्तानपुर – आज दिनांक 14 नवम्बर को भारत सरकार के निर्देशानुसार राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गनपत सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सुल्तानपुर के दोनों परिसरों सीताकुंड स्थित महिला परिसर एवं पयागीपुर स्थित मुख्य परिसर में महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ.ओम प्रकाश पाण्डेय”बजरंगी”के अध्यक्षता में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गीत गायन हुआ एवं भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन से हुआ तत्पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह द्वारा मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. ओमप्रकाश पाण्डेय”बजरंगी”का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा 7 नवंबर 1875 में की गई तथा 24 जनवरी 1950 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद द्वारा संविधान सभा में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी गई।यह गीत भारत के राष्ट्रीय जीवन,स्वतंत्रता-संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण गीत है।इसका महत्व कई दृष्टियों से समझा जा सकता है। इस गीत की पंक्तियाँ देश के प्रति समर्पण, प्रेम और गौरव की भावना जगाती हैं। स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे संघर्ष के समय प्रेरणा-स्रोत माना।गीत में भारतमाता को दुर्गा के रूप में चित्रित कर शक्ति,सौंदर्य और समृद्धि का वर्णन है।यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा और आध्यात्मिक दृष्टि को प्रकट करता है।बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत बंगला और संस्कृत मिश्रित भाषा का उत्कृष्ट उदाहरण है।इसकी काव्यात्मकता, लय, छंद और उपमाएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं।
वंदे मातरम् सुनते ही मन में ऊर्जा,गर्व और सजगता का संचार होता है। यह केवल गीत नहीं,बल्कि राष्ट्रीय चेतना का संग्राम-नाद है,जो हर भारतीय को मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देता है।महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इस गीत ने हमारे देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई क्योंकि इस गीत ने उस दौर में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की और देश की एकता और अखंडता को कायम रखने का कार्य किया।हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो.नीलम तिवारी ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को संगीतमय बनाने का कार्य संगीत विभाग की डॉ.मौसम गुप्ता एवं उनकी टीम ने किया।कार्यक्रम का संचालन एन.एस.एस.के वरिष्ठ कार्यक्रमाधिकारी डॉ.विष्णु शंकर अग्रहरि ने किया।इस कार्यक्रम में एन.एस.एस.के कार्यक्रमाधिकारी डॉ.भोलानाथ,डॉ.देवेन्द्र नाथ मिश्र,डॉ.शाहनवाज आलम,डॉ.दीपा सिंह तथा महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. मोहम्मद शाहिद,प्रो.शक्ति सिंह, प्रो.गीता त्रिपाठी,प्रो.अनुज पटेल,डॉ.भूपेश,डॉ.आलोक रावत,डॉ.दिनेश चंद्र द्विवेदी,डॉ.संध्या श्रीवास्तव,डॉ.अंजू सिंह,डॉ.अर्चना पाण्डेय,डॉ.शैलजा,डॉ.रीना त्रिपाठी आदि के साथ- साथ बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।