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दुद्धी में हादसों के बाद नगर पंचायत का अतिक्रमण विरोधी अभियान,नागरिकों ने ली राहत की सांसे हटाया गया अतिक्रमण

क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

दुद्धी में हादसों के बाद नगरपंचायत का अतिक्रमण विरोधी अभियान,नागरिकों ने ली राहत की सांसे।

तहसीलदार-नायब तहसीलदार, ईओ व प्रभारी निरीक्षक की अगुवाई में कार्रवाई।

दुद्धी/सोनभद्र।(प्रमोद कुमार)बीते दो दिनों में हुए सड़क हादसों ने दुद्धी नगरवासियों को गहराई से हिला दिया है। रविवार को जहां चार वर्षीय मासूम टीपर की चपेट में आकर काल के गाल में समा गया, वहीं सोमवार को एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।

लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आक्रोशित नागरिकों की मांग पर मंगलवार को पुलिस और नगर पंचायत प्रशासन हरकत में आया और कस्बे में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया।
मंगलवार दोपहर नगर पंचायत और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ब्लॉक तिराहा से लेकर बस स्टैंड, तहसील तिराहा, संकटमोचन मंदिर व मां काली मंदिर अमवार मोड़ तक पहुंची। तहसीलदार अंजनी सिंह, नायब तहसीलदार ओ.पी. सिंह, अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह तथा प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह की अगुवाई में टीम ने सड़क किनारे किए गए अवैध निर्माण और ठेले हटवाए। पुलिस बल की मौजूदगी में कई दुकानदारों और ठेला संचालकों को मौके पर ही चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जिन्हें अभी भी अवैध कब्जा हटाना बाकी है, उन्हें अंतिम अवसर दिया जा रहा है। यदि कल तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो जब्ती कार्रवाई की जाएगी।
अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर अफरा-तफरी और हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, लेकिन अधिकांश दुकानदारों ने स्वयं ही अपना सामान और ठेले हटाने शुरू कर दिए।
तहसीलदार अंजनी सिंह ने मौके पर कहा कि हालिया हादसों ने चेताया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रही। कस्बे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क और यातायात नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने में टालमटोल करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है। नायब तहसीलदार ओ.पी. सिंह, अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह और प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने भी संयुक्त रूप से कहा कि साफ-सुथरी सड़कें और व्यवस्थित यातायात ही दुर्घटनाओं पर रोक लगाने का आधार बन सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने अभियान के प्रति संतोष जताते हुए प्रशासन की कार्रवाई की सराहना की। लोगों का कहना था कि अतिक्रमण के कारण पैदल चलना चुनौती बन चुका था। यदि इस तरह की कार्रवाई नियमित रूप से और कठोरता के साथ होती रहे तो न केवल यातायात सुचारु रहेगा बल्कि हादसों पर भी अंकुश लग पाएगा।