50 से कम बच्चों वाले स्कूल बंद करने के फैसले से खतरे में दलित-आदिवासी बच्चों की शिक्षा,युवा मंच का विरोध
क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

50 से कम बच्चों वाले स्कूल बंद करने के फैसले से खतरे में दलित-आदिवासी बच्चों की शिक्षा,युवा मंच का विरोध
• प्राथमिक विद्यालयों की बंदी के खिलाफ चलाया संवाद अभियान
दुद्धी/सोनभद्र।(प्रमोद कुमार)उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 50 से कम बच्चों वाले विद्यालयों को बंद करने के फैसले का युवा मंच ने विरोध किया है। युवा मंच की टीम ने 21 जुलाई 2025 को डडियरा, बलियरी, खैराही, किरवानी, गोविंदपुरआश्रम आदि गांवों का दौरा किया और पाया कि इन विद्यालयों के बंद हो जाने के कारण बेहद गरीब दलित और आदिवासी समुदाय के बच्चे शिक्षा से ही वंचित हो जाएंगे।
टीम को अभिभावकों ने बताया कि विद्यालयों के बंद होने से काफी लंबी दूरी छोटे-छोटे बच्चों को पैदल तय करनी पड़ेगी। जिसके कारण उनकी शिक्षा को सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं होगा।
युवा मंच की टीम ने कहा कि हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी यह कहा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो और हर बच्चे के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी वह सुनिश्चित कराएं।इसलिए सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और विद्यालय बंदी के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए।
युवा मंच की टीम ने कहा कि पहले ही दुध्दी जैसे पठारी-पहाड़ी इलाके में बच्चों की शिक्षा का स्तर बेहद खराब है। आमतौर पर बच्चे कक्षा 8 के बाद ड्रॉप आउट हो जा रहे हैं।
युवा मंच की टीम ने कहा कि बच्चों की शिक्षा को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और शीघ्र ही जिला प्रशासन से मिला भी जाएगा।
युवा मंच की टीम का नेतृत्व जिला संयोजक सविता गोंड और जिलाध्यक्ष रूबी सिंह गोंड ने किया। उनके साथ ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के जिला संयोजक कृपा शंकर पनिका, मजदूर किसान मंच के नेता राम विचार गोंड आदि लोग भी शामिल रहे।
