खुले तारों और असुरक्षित झूलों के बीच खुर्शीद क्लब में चल रही प्रदर्शनी, विद्युत सुरक्षा पर उठे सवाल

Crime journalist (सम्पादक -सेराज खान)

ब्यूरो चीफ सुल्तानपुर आकृति अग्रहरि

खुले तारों और असुरक्षित झूलों के बीच खुर्शीद क्लब में चल रही प्रदर्शनी, विद्युत सुरक्षा पर उठे सवाल!

सुलतानपुर – खुर्शीद क्लब परिसर में चल रही प्रदर्शनी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के मौसम में जहां प्रदर्शनी परिसर में कई जगह जमीन दलदली है, वहीं लोहे की पाइपों के सहारे विद्युत कनेक्शन और खुले तारों के बीच लोहे के झूले संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे हालात में किसी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मामले में विद्युत सुरक्षा विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए प्रदर्शनी संचालक को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से अभी पूर्ण एनओसी जारी नहीं की गई है। जिन विद्युत कार्यों को सही पाया गया है, उनके संबंध में ही लिखित रूप से जानकारी दी गई है। अधिकारी के मुताबिक यदि कोई घटना या दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रदर्शनी संचालक की होगी।

लेकिन यहीं से कई गंभीर सवाल भी खड़े होते हैं। जब विद्युत सुरक्षा विभाग की ओर से प्रदर्शनी को पूर्ण एनओसी ही जारी नहीं की गई है, तो फिर 30 जुलाई से प्रदर्शनी संचालित करने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई? क्या प्रशासन ने प्रदर्शनी शुरू कराने से पहले विद्युत सुरक्षा संबंधी सभी मानकों की जांच की थी?

दूसरा सवाल यह है कि यदि विद्युत सुरक्षा विभाग ने व्यवस्था सुधारने के लिए संचालक को नोटिस जारी किया था, तो नोटिस के बाद भी विद्युत व्यवस्था में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ? खुले तार, लोहे की पाइपों के सहारे कनेक्शन और झूलों के आसपास विद्युत व्यवस्था जैसे सवाल अभी भी मौके पर दिखाई दे रहे हैं।

विभाग की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि प्रदर्शनी का बीच-बीच में निरीक्षण किया जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि 15 दिन से अधिक समय से प्रदर्शनी संचालित होने के बावजूद निरीक्षण और मॉनिटरिंग का असर मौके पर क्यों नजर नहीं आ रहा है? क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है या वास्तव में सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच की जा रही है?

बारिश के मौसम में दलदली जमीन, लोहे के ढांचे और विद्युत कनेक्शन का यह मेल किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और विद्युत सुरक्षा विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर संयुक्त निरीक्षण कराएं और सुरक्षा मानकों को पूरा कराए बिना किसी भी जोखिमपूर्ण गतिविधि को संचालित न होने दें।

*अब बड़ा सवाल यही है*—जब विद्युत सुरक्षा की पूर्ण एनओसी नहीं है, तो प्रदर्शनी को संचालन की अनुमति कैसे मिली और जिम्मेदारी तय होने से पहले किसी हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है?