दुद्धी:हरितालिका तीज पर महिलाओं ने किया विधि विधान से पूजा
क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

दुद्धी. हरितालिका तीज पर महिलाओं ने किया विधि विधान से पूजा।
पति के लम्बी आयू की कामना।
दुद्धी/सोनभद्र।(प्रमोद कुमार)तहसील क्षेत्र के सभी मन्दिरों में तीज का व्रत कर महिलाओं ने शिव पार्वती का विधि विधान से पूजा अर्चना किया। मंगलवार को दुद्धी क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में तीज पर्व के अवसर पर अधिकांश व्रती महिलाओं ने अपने अपने घरों तथा दुद्धी के विभिन्न मंदिर जैसे शिव मंदिर , शिवालय मंदिर, डिवहार बाबा शिव मंदिर, हनुमान मंदिर शिवा जी तालाब स्थित शिव मंदिर, पंचदेव मंदिर, हीरेश्वर मंदिर, कनेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों मे दर्शन पूजन किया।
इस दौरान तीज व्रती सुहागिन महिलाओं ने मिट्टी व बालू से बना भगवान शिव, मां पार्वती व गणेश जी की प्रतिमा बनाकर उनका पूजा आरती किया। तथा पुरोहितों एवं ब्राह्मण के द्वारा हरतालिका व्रत कथा का श्रवण किया। दुद्धी प्राचीन शिव मदिर सहित अन्य मंदिरों में पुरोहित ने बताया कि हरतालिका तीज पर्व की क्या मान्यताएं हैं। बताते हैं कि मां पार्वती शिव जी को पति के रूप में पाना चाहती थीं।
इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की। तपस्या के बाद मां पार्वती की कुछ सहेलियों ने उनका हरण कर लिया ताकि वे भगवान शिव से विवाह न कर पाए। इसी कारण इस पर्व का हरतालिका कहा जाता है क्योंकि हरत का मतलब अगवा करना व आलिका का अर्थ सहेलियां माना जाता है। भगवान शिव जैसा पति पाने के लिए कुंआरी कन्याएं भी इस व्रत का विधि विधान से पूजा करती हैं। हरतालिका तीज भाद्र पद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाया जाता है।
कहीं कहीं इस पर्व को गौरी तृतीया व्रत भी कहते हैं। व्रत करने वाली महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। महिलाएं पूरी रात जगकर भजन कीर्तन भी करती हैं। पूजन के बाद भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग व प्रतिमाओं की परिक्रमा भी की जाती है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह होता है। पूजा के दौरान मां पार्वती को जो सिदूर चढ़ाया जाता है, सुहागन प्रसाद के रूप में उससे अपना मांग भरती हैं। और सदैव सुहागन रहने पति के दीर्घायु की मां पार्वती से कामना करते हैं।