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डीपीआरओ कार्यालय में रखा जाता है नियम कानून ताक पर, हो रही किरकिरी

Crime Journalist (सम्पादक – सेराज खान)

ब्यूरो चीफ सुल्तानपुर-आकृति अग्रहरि

डीपीआरओ कार्यालय में रखा जाता है नियम कानून ताक पर, हो रही किरकिरी!

आरटीआई का जवाब 4 महीने से है लंबित, वीडीओ ट्रांसफर और सप्लायर की भूमिका को लेकर डीपीआरओ पर उठे कई सवाल।

सुलतानपुर – जिले के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में कार्य प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी को चार महीने बीतने के बाद भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जबकि कानून के अनुसार, मांगी गई सूचना को 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराना आवश्यक है। एक समाचार पत्र के प्रकाशक द्वारा यह आरटीआई आवेदन दिया गया था। इसमें ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों और सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियों और तैनाती स्थलों से संबंधित 13 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि कितने सफाई कर्मचारी अन्य विभागों में ड्यूटी कर रहे हैं और डीपीआरओ कार्यालय में सचिवों के स्थापना पटल का प्रभारी कौन है। लेकिन न तो समय पर जवाब मिला और न ही कोई कारण बताया गया कि सूचना क्यों रोकी गई। इससे आरटीआई अधिनियम के उल्लंघन के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इसी दौरान कुड़वार ब्लॉक के एक ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) का मामला भी चर्चा में है। इस अधिकारी का करौंदी कला स्थानांतरण कर दिया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद वो पुनः वापस कुड़वार ब्लॉक में लौट आया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, संबंधित अधिकारी पर पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं और काम में लापरवाही के आरोप हैं। नियमानुसार, एक बार स्थानांतरित होने पर तय अवधि तक नए स्थान पर कार्य करना जरूरी होता है, लेकिन यहां इस नियम की खुलेआम अनदेखी की गई। इस प्रकरण में एक सप्लायर की भूमिका भी उजागर हुई है। आरोप है कि यह व्यक्ति ठेका प्राप्त करने के लिए अधिकारियों से संपर्क साध रहा था, और कथित तौर पर उसी के प्रभाव में संबंधित अधिकारी की वापसी हुई। पूरे मामले में अब तक डीपीआरओ कार्यालय की ओर से न तो कोई स्पष्टीकरण दिया गया है, न ही आरटीआई के जवाब में कोई हलचल नजर आ रही है। इससे सरकारी तंत्र की लचर जवाबदेही और मनमानी कार्यशैली सामने आई है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और क्या वाकई दोषियों पर कोई कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा!