सुपरवाइजर को ‘सिरदर्द’ बताने वाले अधिकारी कार्रवाई के सवाल पर चुप

Crime journalist (सम्पादक-सेराज खान)

ब्यूरो चीफ सुल्तानपुर-आकृति अग्रहरि

बसंत वर्मा पर अफसर का बड़ा बयान ‘विभाग का सिरदर्द वही है!

अवैध वसूली प्रकरण में खाद्य सुरक्षा विभाग में हड़कंप!

सुपरवाइजर को ‘सिरदर्द’ बताने वाले अधिकारी कार्रवाई के सवाल पर चुप!

कौन है अनिल शर्मा जिसका का नाम लेकर मामले को की जा रहीं भटकाने की कोशिश?

सुल्तानपुर – लंभुआ तहसील क्षेत्र की आइसक्रीम फैक्ट्रियों में जांच के दौरान कथित अवैध वसूली के आरोपों से घिरे खाद्य सुरक्षा विभाग में अब अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आने लगी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अंजनी मिश्रा, विभागीय सुपरवाइजर बसंत वर्मा और एक निजी चालक की भूमिका को लेकर उठे विवाद के बाद विभाग सवालों के घेरे में है। मामले की गूंज उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय अधिकारियों की बेचैनी भी साफ दिखाई देने लगी है। सबसे बड़ा सवाल उस वक्त खड़ा हो गया जब जिला अभहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) अजीत कुमार ने बातचीत के दौरान स्वयं स्वीकार किया कि “बसंत वर्मा विभाग का सिरदर्द है।” हालांकि जब उनसे पूछा गया कि यदि बसंत वर्मा विभाग के लिए सिरदर्द हैं तो उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई, इस सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

*फैक्ट्रियों की संख्या नहीं पता, फिर कैसे हो रही निगरानी?*
बुधवार को जब जिला अभहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) अजीत कुमार से लंभुआ क्षेत्र में संचालित आइसक्रीम फैक्ट्रियों की संख्या पूछी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वे क्षेत्र में जाते भी नहीं हैं। जबकि स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि तहसील क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन आइसक्रीम फैक्ट्रियां संचालित हैं। यही नहीं, विभागीय कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जांच अभियान के दौरान केवल चुनिंदा तीन इकाइयों से ही नमूने लिए गए। चर्चा है कि जिन संचालकों ने कथित रूप से मनमानी मांगें मानने से इनकार किया, उन्हीं के यहां कार्रवाई हुई, जबकि अन्य इकाइयों को छोड़ दिया गया।

*आरोपों से घिरने पर ‘अनिल शर्मा’ की एंट्री*
पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब जिला अभहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) अजीत कुमार ने बातचीत के दौरान अचानक अनिल शर्मा नामक व्यक्ति का जिक्र करते हुए पत्रकार पर ही सवाल खड़े करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि “अनिल शर्मा से आपकी गठजोड़ है और उसी के इशारे पर यह सब किया जा रहा है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आखिर अनिल शर्मा कौन हैं, उनका इस प्रकरण से क्या संबंध है, तो वे कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके। उन्होंने केवल इतना कहा कि अनिल शर्मा, बसंत वर्मा के गांव के रहने वाले हैं और विभाग की गतिविधियों की जानकारी मीडिया तक पहुंचाते हैं।
जिस व्यक्ति का नाम लेकर पूरे विवाद को नई दिशा देने की कोशिश की गई, उसके बारे में ही अधिकारी सही जानकारी नहीं दे सके। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि कहीं अवैध वसूली के आरोपों से ध्यान भटकाने के लिए किसी तीसरे व्यक्ति का नाम तो नहीं उछाला जा रहा।

*खेत चरय गदहा, मार खाए जुलाहा’ कहकर किसकी ओर किया इशारा?*
बातचीत के दौरान जिला अभहित अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) अजीत कुमार ने “खेत चरय गदहा, मार खाए जुलाहा” जैसी देहाती मुहावरा सुनाकर विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा कर दिया।
इस कहावत में गधा खेत चरकर फसल का नुकसान करता है, लेकिन मार बेचारे जुलाहे (बुनकर) को पड़ती है। अर्थात असली दोषी बच जाता है और किसी दूसरे को दोषी ठहराकर दंड दे दिया जाता है।विभागीय गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मान रहे हैं कि कुछ लोग विभाग के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं, तो फिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

*निजी चालक और निजी वाहन की भूमिका पर भी सवाल*
जांच अभियान में निजी वाहन और निजी चालक की मौजूदगी को लेकर भी विवाद बढ़ता जा रहा है। पहले जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि यदि कोई निजी चालक कार्रवाई में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने अपने बयान को नरम करते हुए कहा कि, “मैं कोई हिटलर नहीं हूं, क्षेत्र में क्या हो रहा है, हर बात का जवाब मैं नहीं दे सकता।”

*कार्रवाई होगी या केवल स्पष्टीकरण?*
सूत्रों के अनुसार पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मामला केवल कागजी जवाबों तक सीमित रहेगा या फिर कथित अवैध वसूली, चयनित इकाइयों पर कार्रवाई, निजी वाहन और निजी चालक की भूमिका जैसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।

*क्यों इतने पीछे पड़े हो?*
पत्रकारों के सवालों से असहज दिखे जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजीत कुमार ने बातचीत के दौरान कहा, “क्यों इतने पीछे पड़े हो?” विभागीय सूत्रों का कहना है कि अवैध वसूली प्रकरण में उठ रहे लगातार सवालों और बढ़ते दबाव के बीच अधिकारियों की बेचैनी अब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगी है।