क्राइम जर्नलिस्ट/सम्पादक – सेराज खान

ब्यूरो दिल्ली – अतुफा इसहाक खान
काव्य शक्ति फाउंडेशन द्वारा आयोजित साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यक्रम “पुरुष की पीड़ा-स्त्री का मन”।
नई दिल्ली/काव्य शक्ति फाउंडेशन द्वारा आयोजित साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यक्रम “पुरुष की पीड़ा – स्त्री का मन” एक अत्यंत संवेदनशील एवं विचारोत्तेजक विषय पर आधारित आयोजन है। इस विशेष अवसर पर समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी मोहम्मद इश्हाक़ खान को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और अधिक बढ़ा दिया।

यह कार्यक्रम समाज में स्त्री और पुरुष दोनों के भावनात्मक, सामाजिक एवं मानसिक संघर्षों को समझने तथा उनके मध्य संवेदनशील संवाद स्थापित करने का एक सार्थक प्रयास था। आज के आधुनिक परिवेश में जहाँ स्त्री सशक्तिकरण पर व्यापक चर्चा होती है, वहीं पुरुषों की आंतरिक पीड़ा, जिम्मेदारियों का दबाव तथा भावनात्मक संघर्ष भी एक गंभीर विषय बन चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य इसी संतुलित दृष्टिकोण को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना था।

विशिष्ट अतिथि मोहम्मद इश्हाक़ खान ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि समाज तभी संतुलित और स्वस्थ बन सकता है जब स्त्री और पुरुष दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और सम्मान दें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता, सहानुभूति और संवाद ही परिवार एवं समाज को मजबूत बनाने की आधारशिला हैं। उन्होंने काव्य शक्ति फाउंडेशन के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना को नई दिशा प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न कवियों, साहित्यकारों एवं वक्ताओं ने अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से पुरुषों की मौन पीड़ा तथा स्त्रियों के अंतर्मन की भावनाओं को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। कविताओं, गीतों और विचार-विमर्श ने उपस्थित श्रोताओं को भावुक भी किया और चिंतन के लिए प्रेरित भी। कार्यक्रम में पारिवारिक संबंधों, सामाजिक अपेक्षाओं और मानसिक संतुलन जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
काव्य शक्ति फाउंडेशन के आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और पारस्परिक सम्मान की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे सार्थक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
समग्र रूप से यह आयोजन साहित्य, संवेदना और सामाजिक जागरूकता का एक सुंदर संगम सिद्ध हुआ, जिसमें मोहम्मद इश्हाक़ खान की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
