अवैध खनन व अवैध कब्जे से जीवनदायनी ठेमा नदी का बदल दिया स्वरूप

क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

अवैध खनन व अवैध कब्जे से जीवनदायनी ठेमा नदी का बदल दिया स्वरूप।

दो दशक पहले जहाँ नदी बहती थी अविरल धारा वहीं नदी के पानी में पड़ने लगे है कीड़े

म्योरपुर ब्लॉक के आरंगपानी पानी से निकली है नदी ,40 -50 किमी की दूरी विभिन्न गांवो से गुजरते हुए दुद्धी के कनहर नदी में होता है संगम।

दुद्धी/ सोनभद्र/ पिछले कुछ वर्षों के दौरान ताबड़तोड़ अवैध खनन व अवैध कब्जे से सदियों से दुद्धी तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांव को अभिसिंचित व पीने के पानी का साधन उपलब्ध कराने वाली जीवनदायनी ठेमा नदी का अस्तित्व अब समाप्ति की ओर है। जहां दो दशक भर पूर्व नदी में अविरल धारा बहा करती है वह नदी अब गंदे नाले में परिवर्तित हो गयी है।ताबड़तोड़ अवैध खनन से जहां नदी का स्वरुप बदल गया है और नदी सुख गयी है वहीं नदी किनारे लागातर हो रहे अवैध कब्जे से नदी की पाट भी सिमटती जा रही है।
म्योरपुर ब्लॉक के आरंगपानी बरवाटोला से निकली ठेमा ,जंगलों से गुजरते हुए मूरता , लीलासी ,गुलालझरिया, डूमरडीहा, रन्नू,बघाडू होते हुए जाबर गांव पहुँचती है जहां से कुछ ही दूर चलकर कनहर नदी में मिल जाती है|इस तरह से 40 – 50 किमी का दूरी का सफर विभिन्न गांवों से होकर गुजरती है, पूर्व के वर्षों में नदी किनारे हरे भरे इमारती लकड़ियों के घने वृक्ष हुआ करते थे जो अवैध कटान से विलुप्त हो गए है। ठेमा नदी के स्थिति पर अब पर्यावरण प्रेमियों ने चिन्ता जताना शुरू कर दिया है,पर्यावरण प्रेमी अवधनारायण यादव ,उदयलाल मौर्य , केवला प्रसाद ,अमरनाथ जायसवाल आदि लोगों नदी की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अब नदी का स्वरूप नाले में बदल गया है इसका प्रमुख कारण अवैध खनन और कब्जे है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए ठेमा नदी को संरक्षित करने का मांग उठाया है, कहा कि नदी के रकबे की पैमाइश की जाए आये इसे किनारे किनारे पेड़ लगाकर हरियाली से आच्छादित किया जाए तभी नदी को बचाया जा सकता है।

जगह जगह बने चेकडैम व छलको से टूटी नदी की अविरल धारा

दुद्धी/ सोनभद्र/ ठेमा नदी के उद्गम स्थल से कनहर संगम मोहान तक 50 किमी के दूरी के बीच किसानों के सिंचाई के उद्देश्य से जगह जगह चैकडेम व छलका बनाये जाने से नदी की अविरल धारा टूट गयी है।बुढ़ बुजुर्ग बताते है कि नदी के उद्गम स्थल से कनहर मोहान तक नदी के किनारे घनघोर जंगल हुआ करता था जो नदी के जलस्तर बनाये रखते थे लेकिन कुछ वर्षों पूर्व से नदी के दोनों तरफ की घनघोर जंगल की ताबड़तोड़ कटान से ये विलुप्त हो गए जहां जंगल उजाड़ हो गए वहीं नदी भी सूखने के कगार पर है। छलको में अब गाद भर जाने से उसकी जल संग्रहण क्षमता भी कम हो गयी है ,इसमें जमे गाद की सफाई भी जरूरी है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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