हाथरस रेप कांड -: जब आप डॉटर्स डे मना रहे थे,वो मौत से लड़ रही थी – मंगलवार की सुबह साढ़े पांच बजे देश की एक बेटी दुनिया से चली गई

क्राइम जर्नलिस्ट(टीम)

*हाथरस रेप कांड -: जब आप डॉटर्स डे मना रहे थे,वो मौत से लड़ रही थी – मंगलवार की सुबह साढ़े पांच बजे देश की एक बेटी दुनिया से चली गई*

*बेटा पढ़ाओ – संस्कार सिखाओ अभियान कानून से ऐसे दरिंदो को फाँसी पर लटकाने की मांग करता है – आकाश झुरिया*

*19 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। उसी के गांव के चार दबंगों ने बलात्कार के बाद उसे लाठियों से इतना मारा कि उसकी गर्दन,हाथ,पैर और रीढ़ की हड्डियां टूट गईं।*

*लक्ष्मणगढ़ – (सीकर) – राजस्थान – 30 – सितंबर – 2020*

हाथरस रेपकांड घटना को लेकर बेटा पढ़ाओ – संस्कार सिखाओ अभियान के सह – संयोजक आकाश झुरिया ने कानून पर तीखे प्रहार करते हुए बेटियों के साथ हो रही रोज – रोज की दरिंदगीयों पर कहा कि बेटियों के साथ दिन – प्रतिदिन हो रही दरिंदगियो व दरिंदगी के बाद कुकृत्य जैसी घटनाएं हर – रोज ना जाने देश की कितनी ही मासूम बच्चियों को निगल रही है। जहा एक ओर हम तीन दिन पहले जब हम मीडिया और सोशल मीडिया पर डॉटर्स डे मना रहे थे,अलीगढ़ के जेएन अस्पताल में एक बेटी जिंदगी और मौत से लड़ रही थी। फेसबुक की हमारी वॉल बेटियों की तारीफ में कविताओं और कसीदों से उमड़ी पड़ी थी और एक बेटी नृशंस बलात्कार और हिंसा के बाद जिंदगी की जंग हार जाने के मुहाने पर पहुंच रही थी। इतना ही नहीं,इस घटना के बाद पिछले 15 दिनों से किसी मेनस्ट्रीम मीडिया में यह खबर चलती दिखाई नहीं दी। प्राइम टाइम डिबेट तब भी सुशांत को न्याय दिलाने में व्यस्त थी।

*जीभ काटी,लाठियों से मारा* -: ये 14 सितम्बर की घटना है। देश की राजधानी से महज 200 किलोमीटर दूर हाथरस के चंदपा क्षेत्र में 19 साल की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। उसी के गांव के चार दबंगों ने बलात्कार के बाद उसे लाठियों से इतना मारा कि उसकी गर्दन,हाथ,पैर और रीढ़ की हड्डियां टूट गईं। वे यही नहीं रुके। उन्हें डर था कि लड़की उनका नाम उगल देगी तो उन्होंने उसकी जीभ काट दी।
यह सुबह की घटना है। लड़की अपनी मां के साथ बाजरे के खेत में चारा काटने गई थी। दबंग पीछे से आए और खेत में घसीट लिया। काफी देर बाद घरवालों ने उसे अधमरी हालत में पाया तो लेकर अस्पताल भागे। अलीगढ़ के जेएन अस्पताल में सोमवार को जब उसकी हालत बिगड़ी तो उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया,लेकिन अगले ही दिन मंगलवार की सुबह साढ़े पांच बजे वो दुनिया से चली गई। कभी ऐसा नहीं हुआ कि औरतों की जिंदगी,उनकी सुरक्षा महीनों तक टीवी चैनलों की प्राइम टाइम डिबेट का मुद्दा बनी हो। कमेटी आनन-फानन में बैठी हो कि कानून को और सख्त करो। आईपीसी की धारा 376 में बदलाव करो,रेप केस के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाओ, 60 दिनों के अंदर चार्जशीट फाइल करो।

*लेकिन उन कानूनों का हुआ क्या?* -: एनसीआरबी के पन्नों में दर्ज हो रहे बलात्कार के आंकड़े लगातार बढ़ते गए। 2016-17 में अकेले देश की राजधानी में इन अपराधों में 26.4 फीसदी का इजाफा हो गया। पूरे देश में यह संख्या इससे 55 फीसदी ज्यादा थी। इस देश की फास्ट ट्रैक अदालतें तो अलग से शोध का विषय हैं,जहां 10-10 साल से मुदकमे न्याय की बाट जोह रहे हैं।
रेप के बाद जिंदा जला देना राजधानी के चमकीले कमरों में बने कानून सेमिनार के पर्चे में तो कोट किए जा सकते हैं,लेकिन इस देश के छोटे शहरों,कस्बों-गांवों में अपनी मर्दानगी और जाति के अहंकार में डूबे मर्द को डराने में नाकाम हैं। वो पूरी दबंगई से न सिर्फ औरतों का रेप कर रहे हैं,उन्हें रेप के बाद जिंदा जलाकर मार भी डाल रहे हैं। वो महिला की हत्या कर शव पेड़ पर लटका दे रहे हैं क्योंकि उसने अपनी मजदूरी 3 रुपया बढ़ाने को कहा था।
वो तेजाब से उसका चेहरा जला रहे हैं क्योंकि उसने छेड़खानी का विरोध किया था। वो उसकी जबान काट दे रहे हैं ताकि रेप के बाद वो उनका नाम न उगल दे। दो साल पहले हरियाणा में एक लड़की के साथ इसलिए रेप हुआ था क्योंकि उसके नंबर क्लास के लड़कों से ज्यादा थे। वो सब कर रहे हैं। 2012 से पहले भी कर रहे थे,उसके बाद भी कर रहे हैं।
*अब आपको समझ आ रहा होगा कि क्यों सिर्फ सख्त कानून उस मर्दवाद और जातिवाद का इलाज नहीं है,जिसकी शिकार हो रही हैं हमारी बेटियां। वही बेटियां,जिनकी मुस्कुराती हुई मासूम तसवीरें लगाकर आप डॉटर्स डे मना रहे थे।*
बेटा पढ़ाओ – संस्कार सिखाओ अभियान कानून से ऐसे दरिंदो को फाँसी पर लटकाने की मांग करता है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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