भगवान भाष्कर को व्रतियों ने दिया अर्ध्य,पति व सन्तान की दीर्घायु सहित लोक मंगल की हुई प्रार्थना

क्राइम जर्नलिस्ट(सेराज खान)

आलोक अग्रहरि, दुद्धी

भगवान भाष्कर को व्रतियों ने दिया अर्ध्य,पति व सन्तान की दीर्घायु सहित लोक मंगल की हुई प्रार्थना।

दुद्धी,सोनभद्र। छठ के महापर्व पर शनिवार को ठाढ़ उपासी के बाद नदियों ,जलाशयों के किनारे थाला पर पहुंची और सुबह उगते हुए हुए सूरज को अर्ध्य दिया। सूर्य देव और छठ मैया की उपासना का पर्व शनिवार को सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ व्रत का पारण किया गया। इस अवसर पर हर जगह तालाबों पर विशेष तैयारियां की गई थी। इस अवसर पर छठ मैया की गीत भजन गाया गया। छठी मैया की पूजा अर्चना करते हुए मन्नते मांगी। दुद्धी के प्राचीन छत्रपति शिवाजी तालाब, धनौरा में लकड़ा बांध पर, मल्देवा में कैलाश कुंज द्वार, खजुरी में शिवमंदिर, दिघुल में ठेमा नदी घाट, टेढ़ा में कनहर सहित अन्य आस पास के नदियों के छठ घाट पर छठी मईया की गीत भजन कीर्तन किया गया।

इस व्रत को करने वाली महिलाएं सदैव पति-पुत्र, धन-धन्य और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होती है। यह व्रत बड़े नियम और निष्ठा से किया जाता है।

व्रती खरना के शाम से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक बिना कुछ खाए-पीए व्रत रखती हैं। इस बार खरना और अर्घ्य के समय विशेष योग है। निर्जला व्रत रखकर छठ पूजा करने वाले छठ व्रतियों द्वारा गुरुवार शाम गुड़ और चावल से बने खीर का भोग एवं प्रसाद ग्रहण कर । शनिवार यानी आज छठ व्रती डूबते सूर्य को गेहूं के आटे और गुड़ व शक्कर से निर्मित मुख्य प्रसाद ‘ठेकुआ’ के अलावा चावल से बने भुसबा, गन्ना, नारियल, केला, हल्दी, सेव, संतरा, फल-फूल हाथों में लेकर जलाशयों में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिए। यह व्रत महिला और पुरुष दोनों करते हैं। इसमें शुद्धता और साफ-सफाई की प्रधानता होती है।

‘नहाय-खाय’ के साथ चार दिनों तक चलने वाला सूर्य की आराधना का महापर्व छठ समापन हुआ। पहले दिन छठ व्रत करने वाले पुरुष और महिला अंत:करण की शुद्धि के लिए नदियों, तालाबों और विभिन्न जलाशयों में स्नान करने के बाद अरवा चावल, चने की दाल और लौकी (कद्दू/घीया) की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। परिवार की समृद्धि और कष्ट निराकरण के लिए इस महापर्व के दूसरे दिन (शुक्रवार को) श्रद्धालु दिनभर उपवास कर सूर्यास्त होने पर खरना किया। यानी श्रद्धालु भगवान भास्कर की पूजा करेंगे और चावल, दूध और गुड़ से बनी खीर व रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। आसपास के लोग भी व्रती के घर पहुंचते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। छठ पर्व के तीासरे दिन छठव्रती सूर्यास्त के समय नदी, तालाबों या किसी अन्य जलाशय पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। पर्व के चौथे की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत समाप्त किया। इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण यानी ‘पारण’ किया। सूर्योपासना का महापर्व छठ ना केवल लोक आस्था का पर्व है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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