दिए जलाओ पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए

क्राइम जर्नलिस्ट(सेराज खान-सम्पादक)

दिए जलाओ पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

सोनभद्र।दियावली, एक धार्मिक, विविध रंगों के प्रयोग से रंगोली सजाने, प्रकाश से सुसज्जित औऱ खुशी का बुराई रूपी अंधकार को हटाकर खुशियाँ मनाने का त्यौहार है। गोपालदास’ नीरज’ द्वारा रचित उक्त पंक्तियां दीवाली के रहस्य को सजोये हुए हम सभी के लिए प्रेरणाश्रोत है। यह त्यौहार हमें अपने जीवन में निराशा रूपी अंधेरे को दूर कर आशाओं के संचार द्वारा अपने जीवन में उजाला भरने का संदेश देती है।यह त्यौहार पूरे भारत के साथ साथ देश के बाहर भी कई स्थानों पर मनाया जाता है।

यह पाँच दिवसीय त्यौहार है जो धनतेरस से शुरु होकर भैया दूज तक मनाई जाती है। दशहरे के बाद सबसे बड़ा मनाया जाने वाला त्योहार दिवाली है जो कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है।

प्रथम दिन गोवत्स द्वादशी, दूसरे दिन धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है।तीसरे दिन नरक चतुर्दशी, जिस दिन दीपावली का त्योहार मनाया जाता है।चतुर्थ दिन गोबर्धन पूजा याअन्नकूट पूजा के रूप में मनाते हैं तथा पाँचवे दिन भैयादूज के पर्व के साथ पाँच दिवसीय त्योहार की समाप्ति होती है।

भारतीय त्योहारों का बिशेष महत्व होता है जिसके माध्यम से हमें स्वयं को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा मिलती है। घर के चारों ओर दिये और मोमबत्ती जलाकर पुरे घर को प्रकाशित किया जाता है। दिवाली का त्यौहार वर्ष का सबसे सुंदर और शांतिपूर्ण समय लाता है जो मनुष्य के जीवन को खुशियों से भर देता है।

क्यों मनाते है दीवाली-हिन्दू मान्यता के अनुसार,भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और उसके राज्य लंका को जीतकर अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आये थे। प्रभु श्री राम के अयोध्या वापस लौटने के दिन दिए जलाकर खुशियां मनाये जो आज दीवाली के रूप में परम्परा बन गयी।

इस दिन धन और समृद्धि की स्वामिनी देवी लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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