क्या कोरोना का अंत मुश्किल है

क्राइम जर्नलिस्ट(टीम)

क्या कोरोना का अंत मुश्किल है?

नई दिल्ली।अगले तीन से छह महीने में कोरोना के अंत की उम्मीद करने वालों के लिए एक बुरी खबर है। वैज्ञानिकों ने वायरस के एक और वार के लिए तैयार रहने की चेतावनी जारी की है। मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के निदेशक माइकल ऑस्टरहोम कहते हैं, महामारी के खात्मे से पहले या तो हर कोई संक्रमित हो चुका होगा या फिर उन्हें टीका लग चुका होगा। कई मामलों में दोनों ही स्थितियां संभव हैं। वहीं, चंद लोग ऐसे भी होंगे, जिन्हें सार्स-कोव-2 वायरस से एक से अधिक बार जूझना होगा। ऑस्टरहोम के अनुसार कोरोना के नए मामलों में उतार-चढ़ाव अभी जारी रहेगा। सर्दियों में दुनिया को एक नई लहर का सामना भी करना पड़ सकता है।

कब खत्म होगी महामारी?
ऑस्टरहोम के मुताबिक कोरोना संक्रमण के नए स्वरूपों से लड़ने और वैश्विक आबादी को टीका लगाने की जद्दोजहद तब तक जारी रहेगी, जब तक वायरस हर किसी को नहीं छू लेता। फिर चाहे वो संक्रमण के रूप में हो या फिर टीकाकरण के जरिये।

कहां संक्रमित होने का खतरा ज्यादा?
बकौल ऑस्टरहोम, दुनिया की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं अनलॉक की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं, जबकि अरबों लोग अब भी टीकाकरण की बांट जोह रहे। ऐसे में स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन से वायरस के प्रसार का जोखिम बढ़ेगा।

कौन ज्यादा संवेदनशील?
ऑस्टरहोम ने कहा, टीकाकरण दर बढ़ने के बावजूद वायरस के प्रति संवेदनशील आबादी में कुछ खास कमी नहीं आएगी। नवजात और छोटे बच्चे, जिन्हें वैक्सीन नहीं लग सकती तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के संक्रमित होने का खतरा बरकरार रहेगा।

नए स्वरूप को लेकर चिंता क्यों?
ऑस्टरहोम कहते हैं, कोरोना जंगल की वो आग है, जो तब तक शांत नहीं होगी, जब तक हर लकड़ी (इंसान) तक नहीं पहुंच जाती। इस बीच, अगर टीके के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने वाले वेरिएंट पैदा हो गए तो महामारी फिर विकराल रूप अख्तियार कर सकती है।

क्या सबसे घातक महामारी में से एक है कोरोना?
डेनमार्क स्थित रोसकिल्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लोन सिमनसन कहती हैं, बीते 130 वर्षों की पांच प्रमुख फ्लू महामारियों का विस्तृत रिकॉर्ड मौजूद है। सबसे लंबी महामारी पांच वर्षों तक टिकी थी। वहीं, बाकी चार दो से तीन साल तक अस्तित्व में थीं। हर महामारी की सालभर में औसतन दो से चार लहर आती थीं। सिमनसन ने कहा, कोरोना महामारी की बात करें तो यह दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। दुनिया तीसरी लहर के मध्य में है, पर इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा। ऐसे में कहा जा सकता है कि यह विश्व इतिहास की सबसे घातक महामारियों में से एक है।

क्या गंभीर संक्रमण के मामले बढ़ेंगे?
सिमनसन के मुताबिक सार्स-कोव-2 वायरस न सिर्फ नया और अलग तरह का वायरस है, बल्कि इसे बेहद संक्रामक भी पाया गया है। वैश्विक स्तर पर यह 46 लाख से अधिक संक्रमितों को मौत के घाट उतार चुका है। विशेषज्ञ कोरोना को 1918 के स्पैनिश फ्लू के बाद की सबसे घातक महामारी करार दे रहे हैं। टीकाकरण दर अधिक होने के बावजूद अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और इजरायल जैसे देशों में बड़ी संख्या में मरीज सामने आ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि वायरस कम उम्र के लोगों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा। उनमें गंभीर संक्रमण पनपने का जोखिम भी ज्यादा होगा।

क्या बार-बार लगवानी होगी वैक्सीन?
वैज्ञानिक धारणा है कि ज्यादातर वायरस खुद का अस्तित्व बचाए रखने के लिए समय बीतने के साथ अपने प्रकोप में कमी लाने लगते हैं। हालांकि, सिमनसन की मानें तो कोरोना के मामले में यह बात लागू नहीं होती। सार्स-कोव-2 वायरस अपने नए शिकार के शरीर में प्रवेश कर उसमें विकसित प्रतिरोधक क्षमता से लड़ने की कला सीख ले रहा है। इससे वायरस के नए स्वरूप लगातार सामने आ रहे हैं और महामारी खत्म होने का नाम नहीं ले रही। सिमनसन के अनुसार कोरोना भविष्य में बहुत हद तक फ्लू सरीखा बन जाएगा। इससे बचाव के लिए लोगों को वैक्सीन का ‘टॉप-अप’ कराते रहना पड़ेगा।

क्या कोरोना का अंत मुश्किल है?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर चार्टर्स कहती हैं, कई देश युद्धस्तर पर टीकाकरण कर कोरोना के कहर पर काबू पाने में कामयाब रहे हैं। वहीं, कई देश अपनी अधिकतर आबादी को अभी तक पहली खुराक भी नहीं लगा पाए हैं। चार्टर्स यह भी कहती हैं कि कोरोना से लड़ाई को लेकर अलग-अलग देशों की अलग रणनीति है। कोई शून्य संक्रमण का लक्ष्य हासिल करने के लिए लॉकडाउन में भरोसा जता रहा है तो कोई अपनी आबादी को महामारी के साथ जीने के लिए तैयार करने का हवाला देते हुए पूरी तरह से अनलॉक कर चुका है। ऐसे में महामारी का अंत हाल-फिलहाल में तो मुश्किल दिखता है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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