ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच काफी लंबे समय से तनातनी रही है

क्राइम जर्नलिस्ट(टीम)

ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच काफी लंबे समय से तनातनी रही है।

देश/विदेश।एजेंसियां, नई दिल्ली-ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच काफी लंबे समय से तनातनी रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका अभी ताइवान के एक अनुरोध को स्वीकार करने पर विचार ही कर रहा है कि ड्रैगन गुस्से से आग बबूला हो चुका है। बीजिंग ने वाशिंगटन में ‘ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि कार्यालय’ के नाम को ‘ताइवान प्रतिनिधि कार्यालय’ में बदलने के खिलाफ अमेरिका को चेतावनी दी है। चीन ने मीडिया की उस रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया है जिसमें यह कहा गया है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन ताइवान को ‘ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि कार्यालय’ का नाम बदलकर ‘ताइवान प्रतिनिधि कार्यालय’ करने की अनुमति देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

फाइनेंशियल टाइम्स ने शनिवार की रिपोर्ट में कहा था कि अमेरिका ताइवान की सरकार को ‘ताइवान’ शब्द को शामिल करने के लिए वाशिंगटन में अपने प्रतिनिधि कार्यालय का नाम बदलने की अनुमति देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, बीजिंग नाराज हो गया और उसने अमेरिका को धमकी तक दे डाली और कहा कि इससे इलाके में शांति भंग होगी।

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग ने इस रिपोर्ट के संबंध में अमेरिकी पक्ष के सामने गंभीर विरोधी दर्ज कराया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि अमरीका को एक-चीन सिद्धांत का पालन करना चाहिए और ताइवान के साथ आधिकारिक रूप से सभी आदान-प्रदान रोकना चाहिए तथा ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक का नाम नहीं बदलना चाहिए। अमेरिका के ‘ताइवान स्वतंत्रता’ की बात कहने का मतलब अलगाववादी ताकतों को गलत संदेश देना है।

संवाददाताओं के सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा कि कहा कि अमेरिकी पक्ष को ताइवान के सवाल को विवेकपूर्ण तरीके से संभालना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि वह चीन-अमेरिका संबंधों और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर कर दे। बता दें कि चीन ताइवान को अपने संप्रभु क्षेत्र के हिस्से के रूप में देखता है और लंबे समय से अमेरिका को स्व-शासित द्वीप को किसी भी समर्थन की पेशकश के खिलाफ चेतावनी देता रहा है।

दरअल, फाइनेंशियल टाइम्स ने आंतरिक अमेरिकी चर्चाओं का हवाला देते हुए कहा कि ताइवान ने बीते मार्च में अमेरिकी सरकार से अनुरोध किया था कि अमेरिकी राजधानी में अपने मिशन का नाम “ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि कार्यालय” से “ताइवान प्रतिनिधि कार्यालय” में बदल दिया जाए। इसके बाद माना जा रहा

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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