राजस्थान के कई बड़ी खबरों के साथ

क्राइम जर्नलिस्ट(टीम)

राजस्थान के कई बड़ी खबरों के साथ।

*रीट लेवल 1 और 2 में हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा की शिक्षण विधियां?*

भाषायी कौशलों का विकास, पाठ्य योजना, शिक्षण सामग्री, मापन एवं मूल्यांकन, आगमन-निगमन विधि, समग्र विधि, व्याख्या विधि और प्रत्यक्ष विधि प्रमुख हैं।

*शिक्षण विधियों में अगर कोई अभ्यर्थी कमजोर है, तो क्या करें?*

राजस्थान।अभ्यास से बड़ा कोई तरीका नहीं, कोई भी अभ्यर्थी नहीं चाहेगा कि सबसे बड़े स्कोरिंग टॉपिक में से कुछ भी छूटे। अगर आप किसी टॉपिक में कमजोर हैं तो उसे पढ़ने का तरीका बदलें। जिन पर पकड़ है उनका रिवीजन ढंग से कर लें। आपको लगता है कि कमजोर है, उनका पता लगाएं और अभ्यास करें।

*शिक्षण विधियों में कई टॉपिक टफ है, उन्हें याद करने का कोई तरीका?*

पढ़ाई करने के दौरान अक्सर बच्चों की शिकायत रहती है कि उन्हें याद नहीं हो रहा। सबसे अच्छा तरीका है ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों का हल करना। एक ही उत्तर पर कई तरह के सवाल बनते हैं। ज्यादा प्रश्न हल करेंगे तो आपकी पकड़ अच्छी बनेगी। परीक्षा के आखिरी समय में किसी नए टॉपिक को छेड़ने से बचें, हां उसका एक बार रिवीजन जरूर कर लें।

*टीचिंग मेथड की सबसे ऑथेंटिक बुक्स कौन सी हैं?*

हिंदी ग्रंथ अकादमी, शिक्षा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त किताबों का ही अध्ययन करें। बी एड पाठ्यक्रम की राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी से प्रकाशित या ISBN नंबर से प्रकाशित किसी अच्छे प्रकाशन की पुस्तकें पढ़ी जा सकती है। मार्केट में उपलब्ध स्टेंडर्ट प्रकाशक की बुक्स आप पढ़ सकते हैं।

*शिक्षण विधियां की तैयारी के महत्वपूर्ण बिंदु*

टेस्ट सीरीज और मॉडल टेस्ट पेपर ज्यादा से ज्यादा हल करने चाहिए। ताकि सवालों को समझ कर समय पर उनका समाधान कर सकें।

क्लियर करने का सबसे महत्वपूर्ण टिप्स: आज टीचिंग मेथड से जुड़े सवालों के जवाब पढ़िए, इनको समझ लिया तो 33 हजार शिक्षकों की लिस्ट में हो सकता है आपका नाम*

जयपुर।REET पास करना और स्कोरिंग करने में बहुत बड़ा फर्क है। अगर आपको रीट में मेरिट में आना है तो बाकी सारे टॉपिक एक तरफ और टीचिंग मेथड एक तरफ। यह रीट में हर अभ्यर्थी के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि सभी सब्जेक्ट का अपना महत्व है, लेकिन शिक्षण विधियां (Teaching Methods) सबसे ज्यादा स्कोरिंग टॉपिक है। रीट परीक्षा में 150 में से लगभग 60 प्रश्न शिक्षण विधि से पूछे जाते हैं। यह पूरे पेपर का 40 प्रतिशत पार्ट है। रीट लेवल वन में हिंदी, संस्कृत, पर्यावरण अध्ययन और गणित इन चार विषयों में कम से कम 60 अंकों के प्रश्न शिक्षण विधियों से आते हैं।

जबकि रीट लेवल दो में भी दोनों भाषाओं और मुख्य विषयों में भी एक बड़ा भाग शिक्षण विधियों का पूछा जाता है। दैनिक भास्कर को भी सबसे ज्यादा सवाल स्कोरिंग टॉपिक और शिक्षण विधियों को लेकर आए थे। तीन दिन में प्राप्त हुए 4 हजार 272 सवालों में से 833 लोगों ने शिक्षण विधियां से जुड़े टिप्स पूछे हैं। जैसे कि शिक्षण विधियां में कौन-कौन से टॉपिक 2021 रीट के लिए महत्वपूर्ण हैं? उनसे जुड़ी समस्याओं के क्या समाधान क्या है? आपके इन सवालों का जवाब दे रहे हैं हमारे साथ जुड़े टीचिंग मेथड एक्सपर्ट डॉ. सतीश मंगल।

*रीट परीक्षा में शिक्षण विधि कितनी महत्वपूर्ण है?*

रीट एग्जाम में शिक्षण विधि के लगभग 60 अंकों के प्रश्न आते हैं, इसलिए एग्जाम को क्रेक करने के साथ ही मेरिट में जगह बनाने के लिए शिक्षण विधियां की तैयारी सबसे महत्वपूर्ण है।

*रीट परीक्षा में शिक्षण विधियों के कौन से टॉपिक महत्वपूर्ण हैं?*

रीट परीक्षा 2021 के लिए प्रमुख शिक्षण विधियां

गणित एवं पर्यावरण अध्ययन
रीट लेवल 1 गणित एवं पर्यावरण अध्ययन में मापन और मूल्यांकन, उद्देश्यों का वर्गीकरण, गणित की प्रकृति और महत्व, आगमन-निगमन विधि, खेल विधि, प्रोजेक्ट विधि, शैक्षक भ्रमण, अभिनय विधि, महत्वपूर्ण शिक्षण विधियां हैं। पर्यावरण अध्ययन का अर्थ, महत्व, क्षेत्र ,पाठ्य योजना, शिक्षण अधिगम सामग्री।

*सामाजिक अध्ययन*

रीट लेवल 2 सामाजिक अध्ययन में मापन औरमूल्यांकन, उद्देश्यों का वर्गीकरण, सामाजिक अध्ययन की प्रकृति, पाठ्य योजना, समस्या-समाधान विधि, प्रायोजना विधि,समाजीकृत अभिव्यक्त विधि, पर्यटन विधि, अभिनय विधि, प्रच्छा प्रतिमान महत्वपूर्ण शिक्षण विधियां हैं।

*विज्ञान और गणित*

रीट लेवल 2 में विज्ञान और गणित में मूल्यांकन और मापन, उद्देश्यों का वर्गीकरण, पाठ्य योजना, गणित एवं विज्ञान की प्रकृति, गणित का महत्व, आगमन-निगमन विधि, विश्लेषण – संश्लेषण विधि, प्रोजेक्ट विधि, प्रयोगशाला विधि, शिक्षण अधिगम सामग्री महत्वपूर्ण शिक्षण विधियां हैं।
*स्कूल खुलेंगे, पर स्टूडेंट्स रोज पढ़ेंगे नहीं: जिन स्कूलों में छात्र ज्यादा हैं और क्लास रूम छोटे, वहां एक दिन के अंतराल पर बुलाए जाएंगे; जहां स्पेस है, वहां लेक्चरर की कमी*

बीकानेर।
राजस्थान सरकार ने एक सितम्बर से क्लास 9 से 12 तक के स्कूल खोलने की घोषणा कर दी है। इसके बाद भी प्रदेश के हजारों ऐसे स्कूल हैं, जहां रोज स्टूडेंट नहीं जा पाएंगे। तमाम ऐसे स्कूल हैं, जहां के क्लास रूम छोटे हैं और छात्र संख्या ज्यादा है। ऐसे में आधे स्टूडेंट्स को एक दिन स्कूल बुलाया जाएगा और एक दिन छुट्‌टी दी जाएगी। फिर अगले दिन छूटे हुए स्टूडेंट स्कूल आ पाएंगे। इस तरह रोज आधे-आधे स्टूडेंट स्कूल जा पाएंगे। राज्य के 131 स्कूल में (D.El.Ed.) के एग्जाम हैं, इसलिए 13 दिन बाद ही ऐसे स्कूल खोले जा सकेंगे।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी SOP में स्पष्ट कहा गया है कि स्कूल के पास जितने क्लास रूम हैं, उनके हिसाब से स्टूडेंट्स को सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए बुलाया जाए। तमाम स्कूलों की स्थिति यही है, इसलिए यहां एक दिन गैप करके विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। आमतौर पर सरकारी स्कूल में कक्षा 11 व 12 में छात्र संख्या ज्यादा होती है। लेक्चरर और क्लास रूम के हिसाब से अधिकांश सरकारी स्कूल मंगलवार को बैच तैयार करके अपने स्टूडेंट्स को सूचित करेंगे कि उनकी क्लास किस दिन से है। स्कूल के पास वॉट्सऐप ग्रुप पहले से बने हुए हैं, जिनका उपयोग अब होगा।

क्लास रूम है तो लेक्चरर नहीं
राज्य में अभी कक्षा एक से आठ तक की क्लासेज बंद हैं। ऐसे में उन क्लास रूम में सोशल डिस्टेंस रखते हुए स्टूडेंट्स को बुलाया जा सकता है, लेकिन लेक्चरर की संख्या कम होने के कारण ये संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उतने ही स्टूडेंट को बुलाया जाएगा, जितने लेक्चरर हैं।

सरकारी सीनियर सेकेंडरी में अलग है हालात

राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 व 12 में स्टूडेंट एडमिशन तो लेते हैं, लेकिन जाते नहीं हैं। साइंस के स्टूडेंट्स तो सिर्फ डमी रहते हुए नीट व जेईई की तैयारी करते हैं। ऐसे में छात्र संख्या के अधार पर अगर स्टूडेंट्स को एक दिन के अंतराल से बुलाया जाता है तो बहुत कम स्टूडेंट्स क्लास में होंगे। वैसे प्रिंसिपल को अपने स्तर पर बैच बनाने व बदलने का अधिकार है। आने वाले पांच-सात दिन में ही सरकारी स्कूलों की स्थिति स्पष्ट होगी।

व्यवस्था सुधारनी होगी

राजस्थान शिक्षक संघ के संजय पुरोहित का कहना है कि स्कूल में एनरोल स्टूडेंट्स के हिसाब से बच्चों को बुलाने के लिए कार्यक्रम अब बनेगा। सरकार को चाहिए कि वो अधिक स्टूडेंट्स वाले स्कूल में लेक्चरर की संख्या बढ़ाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा बैच बनाए जा सकें। खासकर विज्ञान में यह समस्या है।
*तात्कालिक पूर्वानुमान –01*
जयपुर, अलवर, सीकर, भरतपुर, धौलपुर, भीलवाड़ा जिलों और आसपास के क्षेत्रों मे कहीं-कहीं पर मेघगर्जन / आकाशीय बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है|
*दिनांक:- 31/08/2021 उद्गम समय : 0600 IST(आगामी दो से तीन घंटों तक मान्य)*

*श्रीनगर में भी दो साल के बाद निकला जन्माष्टमी का जुलूस*
*श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों ने दो साल के अंतराल के बाद जन्माष्टमी का जुलूस निकाला.* अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुलूस शहर के हब्बा कदल इलाके के गणपतियार मंदिर से शुरू हुआ और ऐतिहासिक लाल चौक स्थित घंटाघर तक पहुंचा. पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित भक्तों ने रथ के साथ नृत्य किया और लोगों के बीच मिठाई बांटी.

उन्होंने कहा कि जुलूस अमीरकदल पुल को पार कर जहांगीर चौक से गुजरा और मंदिर लौट आया. पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित भक्तों ने रथ के साथ नृत्य किया और लोगों के बीच मिठाई बांटी. श्रद्धालुओं में से एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि दो साल बाद उन्हें श्रीनगर में जन्माष्टमी का जुलूस निकालने की अनुमति मिली.

कोविड-19 के कारण 2020 में कोई जुलूस नहीं निकाला गया था, जबकि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन के कारण इस आयोजन को रद्द कर दिया गया था.

बीएड-बीएसटीसी सेकंड ईयर के विद्यार्थी और 3 साल से रीट की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी रीट परीक्षा तिथि को लेकर आमने-सामने।

एक ने कहा – तैयारी नहीं कर पा रहे इसलिए दो महीने स्थगित हो रीट परीक्षा।

दूसरे ने कहा – पहले ही 6 बार हो चुकी है स्थगित इसलिए 26 सितंबर को ही आयोजित हो रीट।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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