सिडकुल की कंपनी के नाम पर बिक रही नकली दवाएं

क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

सिडकुल की कंपनी के नाम पर बिक रही नकली दवाएं

हरिद्वार।(मोनू खान) सिडकुल की एक कंपनी के नाम पर नकली फैवीपीराविर दवा बनाकर बाजार में बेचने का मामला सामने आया है। फैवीपीराविर दवा कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रही है। कंपनी ने मालिक ने सिडकुल थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
सिडकुल थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने बताया कि सिडकुल स्थित सेक्टर 6ए में अश्वनी गर्ग की लाइफ मैक्स कैंसर लैबोरेटरीज नाम से दवाई बनाने की कंपनी है। अश्वनी गर्ग ने कहा कि उनकी कंपनी के नाम से कोई व्यक्ति नकली फैवीपीराविर 400 टैबलेट बनाकर मार्केट में बेच रहा है। उन्होंने पुलिस को बताया कि नकली दवाई बेचे जाने की जानकारी उनको किसी विक्रेता ने दी। इसके बाद बैच नंबर का मिलान किया तो दवाओं के फर्जी होने का खुलासा हुआ।

अश्वनी गर्ग ने कहा कि नकली दवाइयां बनाकर बेचने से उनकी कंपनी का नाम खराब किया जा रहा है। पुलिस ने अश्वनी गर्ग की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सिडकुल थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने बताया कि दवाइयां कहां से बनाई जा रही हैं, इसके बाद में पुलिस टीम जांच कर रही है।
मनमाने दामों पर बिकी फैवीपीराविर
हरिद्वार। कोविड की दूसरी लहर के दौरान फैवीपीराविर की मांग काफी अधिक बढ़ी थी। शुरुआती दिनों में बाजार में इस दवा की कालाबाजारी हुई। अलग-अलग कई कंपनियां इस दवा को बनाती हैं। कालाबाजारी होने से दवा दोगुने कीमत पर बिकी। हालांकि, कंपनियों के उत्पादन बढ़ाए जाने के बाद कालाबाजारी बंद हुई।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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