कोरोना को काबू करने के लिए लॉकडाउन पर विचार करे केंद्र, सुप्रीम कोर्ट की नसीहत

क्राइम जर्नलिस्ट(सम्पादक-सेराज खान)

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में स्थिति को गंभीर होते देख सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही मामले को संज्ञान लेते हुए कहा है कि अगर किसी मरीज के पास किसी राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश का स्‍थानीय पता प्रमाण पत्र या आईडी प्रूफ नहीं है तो भी उसे हॉस्पिटल में भर्ती करने और जरूरी दवाएं देने से मना नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में दो हफ्ते के भीतर अस्पताल में भर्ती होने संबंधी राष्ट्रीय नीति लाए। कोर्ट ने कहा कि यह नीति सभी राज्य सरकारों की ओर से मानी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक नीति नहीं बनती है तब तक किसी भी मरीजों को बिना स्थानीय एड्रेस प्रूफ या आईडी प्रूफ के भी हॉस्पिटल में भर्ती होने से नहीं रोका जा सकता है।

वहीं, दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली की ऑक्सीजन की आपूर्ति 3 मई की मध्यरात्रि या उससे पहले ठीक कर ली जाए। केंद्र सरकार ऑक्सीजन की सप्लाई की व्यवस्था राज्यों से विचार-विमर्श से तैयार करे। साथ में इमरजेंसी प्रयोजनों के लिए ऑक्सीजन का स्टॉक और आपातकालीन ऑक्सीजन साझा करने की जगह डिसेट्रलाइज करे।

इसके साथ-साथ सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को कोरोना वायरस की वैक्सीन का मूल्य निर्धारण और उसकी उपलब्धतात, ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की उपलब्धता पर फिर से विचार करना चाहिए। बता दें कि राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में ऑक्सीजन की कमी की वजह से कई मरीजों की मौत हो चुकी है।

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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