टीएमसी के बागियों का बोझ नहीं उठा सकी बीजेपी, सत्ता विरोधी लहर साथ लाए दलबदलू विधायक

क्राइम जर्नलिस्ट(टीम)

टीएमसी से बीजेपी में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़े जो तीन नेता जीत सके उनमें सबसे पहला नाम नंदीग्राम से जीते सुवेंदु अधिकारी का है जिन्होंने टीएमसी सुप्रीमो और सीएम ममता बनर्जी को हराया है। सुवेंदु दिसंबर, 2020 में बीजेपी में शामिल हुए और इससे पहले तक ममता के करीबी सिपहसालार माने जाते थे। टीएमसी से 2017 में ही बीजेपी में पहुंचे मुकुल रॉय भी कृष्णानगर सीट जीत गए हैं जहां उन्होंने टॉलीवुड एक्टर कौशानी मुखर्जी को हराया। उत्तर बंगाल में नाटाबाड़ी सीट से टीएमसी विधायक रहे मिहिर गोस्वामी जीत गए हैं जो नवंबर, 2020 में बीजेपी में आए थे।

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चुनाव विश्लेषक और राजनीतिक टीकाकार कहते हैं कि 2017 के बाद से टीएमसी के 37 विधायकों समेत करीब 140 नेताओं ने भाजपा का दामना थामा। इनमें कई ऐसे भी थे जिन्होंने 2020 के अंत में और 2021 की शुरुआत में बीजेपी में एंट्री ली लेकिन उनको टिकट मिल गया। लेकिन चाहे वो सिंगुर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी हों या रवींद्रनाथ भट्टाचार्य हों या फिर मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय, सब हार गए।

चुनाव रुझानों के नतीजों में बदलने के बीच बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा- “ये ठीक बात है कि हमें मनचाहा नतीजा नहीं मिला। हमें देखना होगा कि कहां गलती हुई।” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गृहक्षेत्र भवानीपुर में बीजेपी ने टीएमसी से आए रुद्रनील घोष को उतारा जहां ममता ने ऊर्जा मंत्री सोवनदेब चटर्जी को लड़ाया। घोष हार गए। टीएमसी से बीजेपी में आए विधायकों में बाली से वैशाली डालमिया, डायमंड हार्बर से दीपक हलदर, उत्तरपाड़ा से प्रबीर घोषाल और कालना सीट से बिश्वजीत कुंडु भी चुनाव हार गए।

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और टीएमसी से आए विधायकों और बड़े नेताओं की ये हार तब हुई जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े बीजेपी नेता उनके लिए प्रचार करने आए थे। राजीब बनर्जी, बैशाली डालमिया और प्रबीर घोषाल को तो बीजेपी में अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली में शामिल किया गया था और इन तीनों को चार्टर्ड फ्लाइट से कोलकाता से दिल्ली लाया गया था। अमित शाह ने ममता बनर्जी भवानीपुर में रूद्रनील घोष के लिए प्रचार किया जो ममता बनर्जी का होम सीट है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए नेताओं को गद्दार बता रही थीं और आरोप लगा रही थीं कि जो-जो छोड़कर गए वो सब भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए थे। ममता सरकार में मंत्री पार्था चटर्जी कहते हैं- “ये नतीजे बाहरी लोगों को लगाकर ताकत से बंगाल पर कब्जा जमाने की बीजेपी की कोशिश, भ्रष्ट नेताओं और केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ आम लोगों के विरोध की झलक है।”

सेराज खान / गोविन्द अग्रहरि / नितेश पाण्डेय / श्याम अग्रहरि

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